वास्तु देव पूजन और गृह प्रवेश मुहूर्त का महत्व: जानें सुख-समृद्धि का रहस्य

वास्तु देव पूजन और गृह प्रवेश मुहूर्त का महत्व: जानें सुख-समृद्धि का रहस्य

वास्तु पूजन क्यों है आवश्यक?

वास्तु का शाब्दिक अर्थ है – ऐसा स्थान जहां भगवान और मनुष्य एक साथ वास करें। भारतीय परंपरा में इसे केवल भवन निर्माण की प्रक्रिया न मानकर, जीवन में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि लाने वाला एक विज्ञान माना गया है। हमारे शरीर की तरह ही हमारा घर भी पंचतत्वों – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश – से प्रभावित होता है। यदि ये तत्व संतुलन में न हों, तो घर में नकारात्मक ऊर्जा, अशांति, रोग और आर्थिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसे ही वास्तु दोष कहा जाता है।

वास्तु दोष को दूर करने का उपाय: वास्तु शांति पूजन

यदि भवन निर्माण में कोई त्रुटि हुई हो या घर में बार-बार परेशानियां आ रही हों, तो वास्तु दोष निवारण हेतु वास्तु देव पूजन किया जाता है। इस पूजन के माध्यम से पंचतत्वों को संतुलित किया जाता है, देवताओं का आवाहन किया जाता है, और घर के वातावरण को शुद्ध कर, सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया जाता है। यह न केवल क्लेश और रोगों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि आर्थिक उन्नति व संतान सुख में भी सहायक होता है।

वास्तु शांति पूजन की विधि

वास्तु पूजन में निम्न महत्वपूर्ण चरण शामिल होते हैं:

  • गणेश पूजन और कलश स्थापना

  • नवग्रह पूजन एवं वास्तु मंडल का निर्माण

  • वास्तुपुरुष का आह्वान और 81 पवित्र स्थानों पर देवताओं की स्थापना

  • हवन, बलिदान और पूर्णाहुति

  • ब्राह्मण भोज व दक्षिणा

मुख्य मंत्र:
“ॐ नमो नारायणाय वास्तुरूपाय, भुर्भुवस्य पतये भूपतित्वं मे देहि ददापय स्वाहा।”

यह मंत्र 108 बार आहुतियों के साथ जप कर, वास्तु दोष को शांत किया जाता है।

कब कराएं वास्तु शांति?

  • नए घर में प्रवेश से पहले

  • पुराने घर को तोड़कर नया निर्माण करने पर

  • घर में लगातार क्लेश, रोग या धनहानि हो रही हो

  • लंबे प्रवास के बाद घर वापसी पर

  • प्लॉट या मकान खरीदने के बाद

  • जब भवन वास्तु नियमों के विरुद्ध निर्मित हो

कौन-से महीने और तिथियां हैं गृह प्रवेश के लिए शुभ?

सबसे शुभ महीने:
माघ, फाल्गुन, वैशाख और ज्येष्ठ

सावधानी रखें:
आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और पौष में गृह प्रवेश वर्जित माना गया है। साथ ही, मलमास (सूर्य का धनु या मीन राशि में प्रवेश) में भी प्रवेश नहीं करना चाहिए।

शुभ तिथियां:
शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी और त्रयोदशी

शुभ वार:
सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार

शुभ नक्षत्र:
अश्विनी, रोहिणी, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, उत्तर फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, मघा, रेवती, श्रवण, धनिष्ठा, स्वाति, अनुराधा, शतभिषा

क्या न करें गृह प्रवेश के समय?

  • मंगलवार को गृह प्रवेश न करें

  • रविवार और शनिवार को विशेष परिस्थिति में ही प्रवेश करें

  • बिना पूजन और हवन के घर में न जाएं

  • बिना ब्राह्मण भोजन के गृह प्रवेश अपूर्ण माना जाता है

2026 के प्रमुख गृह प्रवेश मुहूर्त (उदाहरण स्वरूप)

  • फरवरी: 20, 21
  • मार्च-अप्रैल: 4, 5, 6, 14
  • अप्रैल: 20
  • मई-जून: 4, 8, 13 
  • जून: 24, 27
  • जुलाई : 1, 6 

(ध्यान दें: उपरोक्त तिथियां 2026 के लिए  हैं, मुहूर्त के लिए योग्य पंडित या पंचांग से सलाह अवश्य लें)

गृह प्रवेश से पहले ध्यान रखें:

  • घर की पूरी सफाई करें, नमक मिले पानी से पोंछा लगाएं

  • मुख्य द्वार को आम पत्तियों और फूलों से सजाएं

  • प्रवेश करते समय दायां पैर पहले रखें

  • रंगोली से घर को सजाएं

  • सभी देवी-देवताओं की मूर्तियां पूर्व दिशा में रखें

  • हवन के माध्यम से पूरे घर को शुद्ध करें

निष्कर्ष

वास्तु शांति केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि ऊर्जा और संतुलन की एक प्रणाली है। इससे न केवल भवन में सकारात्मकता आती है, बल्कि वहां रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि का वास होता है। यदि आप अपने नए घर में सुखमय जीवन की शुरुआत करना चाहते हैं, तो उचित मुहूर्त में, योग्य ब्राह्मण के मार्गदर्शन में, विधिपूर्वक वास्तु पूजन अवश्य कराएं।