शतभिषा नक्षत्र ज्योतिष रहस्य

शतभिषा नक्षत्र ज्योतिष रहस्य

आज की हमारी चर्चा शतभिषा नक्षत्र पर केंद्रित है। यह आकाश मण्डल में मौजूद तेइसवां नक्षत्र है जो ३०६.४० डिग्री से लेकर ३२० डिग्री तक गति करता है। इस नक्षत्र को प्रयोत्ता, शततारका, वरुणा व्यम भी कहा जाता है। शतभिषा नक्षत्र के स्वामी राहु, नक्षत्र देवता वसु और राशि स्वामी शनि हैं। 

शतभिषा नक्षत्र वैदिक ज्योतिष में

शतभिषा नक्षत्र आकाश मण्डल में मौजूद सौतारों से बनी हुई आकृति है। इसका प्रतीक चिन्ह खाली चक्र है। इस नक्षत्र के स्वामी राहुदेव हैं और यह नक्षत्र ६.४० डिग्री से २० डिग्री तक कुम्भ राशि में गति करता है। इस नक्षत्र के देवता वरुण हैं। शतभिषा नक्षत्र के जातकों के जीवन पर राहु व शनिदेव का प्रत्यक्ष प्रभाव देखा जा सकता है।

            नक्षत्र स्वामी : राहुदेव

            नक्षत्र देव : वरुण

            राशि स्वामी : शनि

            पुरषार्थ : धर्म

            विंशोत्तरी दशा स्वामी : राहुदेव

            चरणअक्षर : गो, सा, सी, सु

            वर्ण : शूद्र ( कसाई )

            गण : राक्षस

            योनि : अश्व, घोड़ी 

            नाड़ी : आदि

            पक्षी : रेवन

            तत्व : आकाश

            प्रथमचरण : गुरु

            द्वितीयचरण : शनि

            तृतीयचरण : शनि

            चतुर्थचरण : गुरु

            वृक्ष : कदम्ब

            बीजमंत्र : ॐ लं

इस नक्षत्र के जातकों की कल्यना शक्ति के अन्तर्गत ईमानदारी, तीव्र बुद्धि, अनुभवी, भावनात्मक रूप से नियंत्रित, चीजों के गहन स्तर तक जाकर ख़ोज करने में रूचि, समृद्ध, किफायती, चतुर, स्वयं का बचाव करने में सक्षम, उद्यमी, विशेष रूप से ज्योतिष और अन्य रहस्यमय विषयों में रुचि रखने वाला, पहेली हल करने में रूचि, उत्तम सेवाएं प्रदान करने वाले होते हैं, स्वयं के भीतर खुशी खोजने वाला, दृढ सिद्धांतों वाला, दानी, लेखन कला में कुशल, उत्तम याददाश्त, साहसी, निर्भीक, कलात्मक प्रकृति, शत्रुओं को पराजित करने वाला होता है !
इस नक्षत्र के जातको में अकेलापन, विषादपूर्ण, आत्मविश्वास का अभाव, प्रतिबंधित, चुप, ठग कलाकार, अस्थिर, तार्किक, अल्पभाषी, वास्तविक इरादे छुपाने वाला, कंजूस, अपनी आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं, रिश्तों में समस्याएं, बेहद अधीन या मानसिक रूप से पीड़ा महसूस करना, संतान या भाई-बहनों के साथ समस्यापूर्ण सम्बंध, गुप्त रहस्यमयी व्यक्तित्व, स्वयं को कमजोर समझने वाला, आत्मविश्वास में कमी, जिद्दी स्वभाव का होना, इनकी प्रमुख कमजोरियाँ हो सकती हैं !
इस नक्षत्र के जातक प्रायः चिकित्सक, आरोग्य प्रदाता, शल्य चिकित्सक, एक्स-रे तकनीशियन, खगोलविद, ज्योतिषी, अभियंता, वैमानिकी, अंतरिक्ष अभियंता, विमान-चालक, परमाणु भौतिकज्ञ, शोधकर्ता, विद्युत्कार, लेखक, लिपिकीय कार्य, सचिव, फिल्म और टेलीविजन, दवा सम्बंधी कार्य, औषधि सम्बंधी कार्य, दवा विक्रेता, अपशिष्ट निपटान, मोटर-सम्बंधी उद्योग, अन्वेषक, गणतिज्ञ, ज़ेन चिकित्सक बन सकते हैं !